🌄 परिचय – जहाँ बादल झुककर धरती को चूमते हैं
छत्तीसगढ़ के हृदय में बसे बस्तर संभाग के कांकेर जिले की पहाड़ियों के बीच छिपा है एक ऐसा रत्न, जिसका नाम है कानागांव धारपारुम हिल स्टेशन और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से ये सुंदर हिल स्टेशन लोगों से ओझल रहा ।यह जगह अब भी पर्यटन के नक्शे पर नया है, लेकिन जो भी यहाँ आता है, वह इसे धरती का स्वर्ग कहे बिना नहीं रह पाता। हरियाली से लिपटी पहाड़ियाँ, ठंडी हवाओं की सरगम और दूर तक फैली नीली वादियाँ इस जगह को आत्मा को सुकून देने वाली बनाती हैं।
🌿 इतिहास और स्थानीय पहचान
कानागांव और धारपारुम गाँव न सिर्फ़ प्राकृतिक दृष्टि से सुंदर हैं, बल्कि यहाँ की मिट्टी में आदिवासी संस्कृति की खुशबू भी बसी है। यह इलाका गोंड और मुरिया जनजाति के पारंपरिक जीवन, लोकगीतों और हस्तकला के लिए जाना जाता है। यहां की पत्थरों पर बना पुरातात्त्विक शैल चित्र का भी अवशेष पाए गए हैं जो इसे इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है और यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि धारपारुम का नाम धारपारुम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां पत्थरों के बीच से पानी की धार बहती है। अब भी प्रकृति के साथ तालमेल में जीते हैं — यह जगह आपको “प्रकृति और मानव का सह-अस्तित्व” सिखाती है।
🏞️ यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता
घने जंगल और झरने: चारों ओर घने साल और सागौन के पेड़, जिनके बीच से बहती छोटी-छोटी धाराएँ एक अद्भुत संगीत रचती हैं।
धुंध में लिपटी पहाड़ियाँ: सुबह के वक्त जब सूरज की पहली किरणें धुंध को चीरती हैं, तो पूरा इलाका किसी परी कथा का दृश्य लगता है।
पंछियों का स्वर्ग: यहाँ आने वाले पर्यटक सुबह की शुरुआत स्थानीय पक्षियों के मधुर कलरव से करते हैं।
🚗 कैसे पहुँचें
निकटतम शहर: कांकेर से कोकपुर,पीठ़ापाल होते हुए कानागांव (लगभग 24–30 किमी दूर)
कैसे जाएँ:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से धमतरी होते हुए कांकेर तक राष्ट्रीय राजमार्ग NH30 से पहुँचा जा सकता है (लगभग 150 किमी)।
वही अगर आप बस्तर संभाग की मुख्यालय जगदलपुर से कोंडागांव, केशकाल से होते हुए कांकेर राष्ट्रीय राजमार्ग NH 30 से पहुंचा जा सकता है ( लगभग 150किमी)
कांकेर से स्थानीय टैक्सी या बाइक राइड लेकर कानागांव धारपारुम की ओर बढ़ें — रास्ता रोमांचक और बेहद सुंदर है।
🏕️ क्या करें यहाँ
ट्रेकिंग और एडवेंचर: हिल स्टेशन तक की चढ़ाई रोमांचक है — जंगल के रास्तों से गुजरते हुए आप प्रकृति को करीब से महसूस करेंगे।
कैम्पिंग: तारों भरा आसमान, ठंडी हवाएँ और जलती हुई अलाव की गरमाहट — यह अनुभव अविस्मरणीय बन जाता है।
फोटोग्राफी: हर मोड़ पर ऐसा दृश्य मिलता है जो कैमरे में कैद करने योग्य होता है।
🍃 स्थानीय खान-पान
यहाँ के स्थानीय व्यंजन भी उतने ही खास हैं जितनी यहाँ की वादियाँ। महुआ की मिठास, कोसरा-रोटी, और चटनी की सुगंध हर यात्री की थकान मिटा देती है।
💬 स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी
धारपारुम के लोग मुस्कान के साथ आपका स्वागत करते हैं। वे बताते हैं कि “यहाँ का हर पेड़, हर झरना भगवान का रूप है” — और सच में, इस भावना को महसूस करने के बाद आप समझ जाते हैं कि यह जगह सिर्फ़ घूमने की नहीं, जीने की जगह है।
🌈 निष्कर्ष
कानागांव धारपारुम हिल स्टेशन सिर्फ़ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव है। अगर आप भी शहरों के शोर से दूर, प्रकृति की गोद में सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो अगली बार कांकेर ज़रूर आइए।
यहाँ की हर हवा आपको फुसफुसाकर कहेगी —
“धीरे चलो यात्री, यहाँ समय नहीं चलता... यहाँ सिर्फ़ प्रकृति बोलती है।” 🌿

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